मथुरा, मार्च 24 -- गृहिणी को 'गृह-लक्ष्मी' के सम्मानजनक शब्द से सम्बोधित किया गया है, जिसका अर्थ है कि वह नैतिक दृष्टि से सुदृढ़ और स्वभाव की दृष्टि से देवी स्वरूपा हैं। मधुरता तथा सद्भाव का अमृत उसमें बहता रहता है। इसके द्वारा वह मुसीबत के समय में अपने घर के सदस्यों को धैर्य बंधाती है, दिशा बताती है और साथ ही प्रेरणा देती है। देखा जाए तो परिवार और समाज की मजबूत आधारशिला ही गृहिणी है, जिसमें अपार शक्ति है। वह तमाम मुश्किलों के बाद भी वह अपने परिवार और घर के संरक्षण में कोई कसर नहीं छोड़ती है। हिणी घर की देवी होती है। घर का हर सदस्य जिसका ऋणी है वही गृहिणी है। किसी के लिए वह मां है, दादी है, नानी है, पत्नी है और बहन है। इतने रूप निभाते-निभाते वह खुद के सपनों को भुला देती है। पति को व्यापार में और नौकरी में तरक्की चाहिए, बेटे-बेटी को शिक्षा क...