बोकारो, मार्च 13 -- गैस सिलेंडर को लेकर बोकारो में ऊहापोह का माहौल बना हुआ है। लोग चिंतत है। युद्ध के बीच लोगों के घर का भोजन कैसे पकेगा? वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में क्या-क्या किया जा सकता है। जिन व्यवस्थाओं को कल तक रूढ़ी व ग्रामीण व्यवस्था के नाम पर लोग त्याग कर स्वयं को शहरीकरण में ढाल रहें थें, आज वो दौर स्वयं को दोहराने के कगार पर खड़ा है। बिजली की लचर व्यवस्था के बीच लोग हीटर व इंडेक्शन चूल्हा पर भी अधिक निर्भर नहीं रह सकते है। ऐसे में उनके पास लकड़ी, कोयला व गोबर के उपले ही विकल्प के रूप में इस्तमाल करने का रास्ता बचता है। वहीं, बोकारो में लकड़ी मिल की बंदी या कमी लोगों की चिंताओं को और अधिक बढ़ा रही है। लोग सरकार से उम्मीद लगाए बैठे है कि वे जनहित में कोई ठोस व निर्णायक कदम उठाएंगे, जिससे लोगों को तत्काल राहत मिल सकेगी। ऐसा नहीं ...
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