बाराबंकी, मार्च 30 -- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले जहां एक ओर रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत ने घर का बजट बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर अब बच्चों की महंगी कॉपी-किताबें और स्कूल ड्रेस अभिभावकों के लिए नई मुसीबत बन गई है। दोहरी मार झेल रहे अभिभावकों का कहना है कि स्कूल और दुकानदारों की मिलीभगत से उनका खुलकर शोषण किया जा रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि कई निजी स्कूल उन्हें चुनिंदा दुकानों से ही किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। बाजार में सस्ती उपलब्धता के बावजूद स्कूल द्वारा दी गई लिस्ट केवल तय दुकानों पर ही मिलती है, जहां कीमतें मनमाने ढंग से वसूली जा रही हैं। इतना ही नहीं, किताबों के साथ महंगी कॉपियां और अनावश्यक स्टेशनरी भी खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, कई स्कूलों में वेंडर सिस्टम के जरिए किताबों की स...