बहराइच, नवम्बर 1 -- महिला श्रमिकों की जिंदगी संघर्षों से भरी हुई है। पुरुषों के बराबर काम करने के बावजूद उन्हें उचित मजदूरी नहीं मिलती। जिससे परिवार में हमेशा आर्थिक तंगी बनी रहती है। घरेलू काम करनेवाली महिलाओं का कहना है कि वे रोज दूसरे के घरों में काम कर जीवन यापन करती हैं। असंगठित होने के कारण इन्हें बदहाली का दंश झेलना पड़ रहा है। उन्हें राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और बुजुर्ग महिलाओं को वृद्धावस्था पेंशन तो मिलती है, पर विपरीत परिस्थिति में इन्हें कर्ज लेना पड़ता है। फिर उसे चुकाने में वे महिलाएं बेदम हो जाती हैं। इस बदहाली को दूर करने के लिए वे सरकारी पहल की मांग कर रही हैं। आर्थिक दुश्वारियों से भरण-पोषण मुश्किल हो गया है। बीमारी या हादसे की स्थिति में इन्हें कर्ज लेना पड़ता है और फिर उसका सूद चुकाने में वर्षों जूझती रहती हैं। वह कहत...
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