श्रावस्ती, दिसम्बर 18 -- गेहूं, धान, मक्का, गन्ना के अलावा जिले के किसान बड़े पैमाने पर वैकल्पिक खेती जैसे आलू, गोभी, मटर, टमाटर व लतावर्गीय सब्जी की फसलों को उगा रहे हैं लेकिन लागत और मेहनत के अनुरूप उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकी है। हालत यह है कि किसानों की इससे सिर्फ रोजी-रोटी चल रही है। सरकारी स्तर पर तहसील क्षेत्रों में भंडारण की व्यवस्था न होने के कारण सब्जी के किसानों की मुश्किलें बढ़ती हैं। वहीं महसी तहसील को छोड़ जिला मुख्यालय सहित नानपारा, रिसिया, पयागपुर, मिहींपुरवा, कैसरगंज में अनाज भंडारण की व्यवस्था तो है, ज्यादातर किसान उपज तैयार होते ही औने-पौने भाव में बेच देते हैं। जिसका कारण यह है कि उन्हें अगली फसल के लिए खाद-बीज खरीदना होता है। किसानों का कहना है कि खाद व बीज के द...
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