बहराइच, मार्च 7 -- जिले के अधिकांश पशु चिकित्सालयों में डॉक्टर नहीं हैं, जिससे पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए निजी चिकित्सकों पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकारी पशु चिकित्सालयों में आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध नहीं होती हैं, जिससे पशुपालकों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। सरकारी पशु चिकित्सालयों की कमी और अव्यवस्था के कारण पशुपालक निजी चिकित्सकों और अप्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। यह समस्या आजीविका और पशु स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जहां बीमार पशुओं के लिए समय पर सरकारी सेवाएं नहीं मिल पातीं। निजी डॉक्टर फोन पर तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं। जबकि सरकारी व्यवस्था में काफी समय लग जाता है। बाढ़ के समय पशुपालकों को अपने पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में परेशानी होती है और उनके पशुओं को नुक...
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