बहराइच, मार्च 12 -- स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने एमआरएफ सेंटर, जो गांवों में कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की आशा थे, वे आज सही मशीनरी, ऑपरेटरों की कमी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। इसके कारण न केवल स्थानीय पर्यावरण खराब हो रहा है, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान की सफलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आलम ये है कि गांवों के एमआरएफ सेंटर सिर्फ कागजों में चल रहे हैं। सेंटरों के निष्क्रिय होने से गांवों की सड़कों पर गंदगी फैली हुई है। जिसमें भयंकर दुर्गंध उठ रही है। मौके पर कोई मशीनरी या काम नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस उद्देश्य से सेंटर बनाए गए थे वे अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। गर्मी शुरू हो रही है। मच्छरों की तादाद बढ़ने लगी है। संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बना हुआ है। हिन्दुस्तान ने जिले के एमआरएफ सेंटर...
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