बक्सर, फरवरी 1 -- शादी-विवाह, त्योहार और धार्मिक आयोजनों की कल्पना बिना मिठाई और नमकीन के अधूरी है। ऐसे हर शुभ अवसर की मिठास जिनके हाथों से तैयार होती है, वही हलवाई समाज आज अपने अस्तित्व और भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। भारतीय खाद्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा यह पारंपरिक व्यवसाय आज आर्थिक दबाव, बदलते बाजार और असमान प्रतिस्पर्धा के कारण संकट में नजर आ रहा है। सबसे बड़ी समस्या कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमत है। चीनी, दूध, घी, ड्राई फ्रूट्स और खाद्य तेल के दामों में बेतहाशा वृद्धि से लागत काफी बढ़ गई है। वहीं ग्राहकों की अपेक्षाओं के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखना भी चुनौती बनती जा रही है। सीमित संसाधनों के कारण छोटे दुकानदार न तो अत्याधुनिक मशीनें खरीद पा रहे हैं और न ही बड़े पैमाने पर उत्पादन कर पा रहे हैं। बोले गंभीर चुनौतिय...
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