फिरोजाबाद, मार्च 23 -- महिला पुलिस का नाम सुनते ही एक सवाल जहन में कौंधता है कि आखिर पुलिस विभाग में महिलाओं की जरूरत कब और क्यों पड़ी। इसकी जानकारी सात साल पहले कॉमन कॉज संस्था ने स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया नामक रिपोर्ट में दी। दरअसल, आजादी के बाद हुए दंगों में अपहरण और दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ने लगीं। इसी दौरान हिंदू-मुस्लिम लोगों का प्रवास हुआ। महिला विस्थापितों ने भारी संख्या में भारत में प्रवेश किया। इसके चलते सरकार को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा। इसे काबू करने के लिए सरकार ने सन् 1948 में कुछ महिलाओं की पुलिस विभाग में भर्ती की। इसके बाद जैसे-जैसे बच्चों और महिलाओं के विरुद्ध अपराध बढ़े, उनके बयान दर्ज करने व पूछताछ आदि करने के लिए और अधिक संख्या में महिला पुलिस कर्मियों की जरूरत पड़ने लगी। वर्तमान में हर जिले में महिला थाना है। ...
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