फिरोजाबाद, मार्च 31 -- एक समय था जब घर-घर जाकर दिवाकर समाज के लोग मैले- कुचैले कपड़े एकत्र करते थे। इन कपड़ों को धोकर और प्रेस करके घर-घर पहुंचाने के बाद मिलने वाला मेहनताना ही उनकी जीविका का एकमात्र साधन था। जिला प्रशासन से लेकर नगर निगम और जिले के प्रशासनिक व्यवस्था में दिवाकर समाज के लोगों का बड़ा सहयोग है। सरकारी और प्राइवेट कार्यालय की कुर्सी पर पड़ी तौलिया से लेकर साहब के कपड़े धोने तक का काम दिवाकर समाज के लोग करते हैं लेकिन इन सब के बावजूद उनकी बुनियादी समस्याओं को लेकर कोई पहल नहीं हुई। न तो नगर निगम ने उनके लिए कोई व्यवस्था की और न ही प्रशासन ने उनके लिए कभी कोई जरूरी इंतजाम जुटाए। दरअसल यमुना में प्रदूषण होने के बाद उनके भी यमुना घाटों पर कपड़े धोने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद सरकार ने भी आज तक उनके लिए कोई विशेष योजना संचालित नहीं की...
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