फिरोजाबाद, मार्च 3 -- जिले में 6500 आशा कार्यकर्ता और आशा संगिनी हैं। उनके जिम्मे कई काम रहते हैं। हर एक काम का अलग-अलग इन्सेंटिव तय है। इसके अलावा हर माह अलग-अलग बैठकें कराने पर निर्धारित रकम के तौर पर 3500 रुपये मिलते हैं, मगर इससे उनका व परिवार का जीविकापार्जन नहीं हो पा रहा है। समय से मानदेय भी नहीं मिलता है। प्रोत्साहन राशि लंबे समय से लंबित है। इसके लिए लगातार आवाज उठा रहीं हैं पर समस्या है कि समाधान होने का नाम नहीं ले रही हैं। आशा कार्यकत्रियों का कहना है कि सुबह हो या शाम, दिन हो या रात, पूस की कड़कड़ाती सर्दी हो या फिर जेठ की तपती दोपहरी न वे रुकती हैं और न ही उनका काम। हर वक्त काम का बोझ रहता है। एक काम निपट नहीं पाता तब तक दूसरा थमा दिया जाता है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के बोले फिरोजाबाद के तहत आयोजित संवाद में आशा कार्यकत्र...