फिरोजाबाद, मार्च 24 -- देश और विदेशों में सुहागनगरी के नाम से प्रसिद्ध फिरोजाबाद की श्रमिक बस्तियों में घर-घर चूड़ी जुड़ाई का काम होता है। दिन-रात कड़ी मेहनत करने के बावजूद अधिकांश परिवारों का अच्छी तरह से भरण-पोषण भी नहीं हो पाता है। ऐसे में कई परिवार कर्ज के चंगुल में फंस जाते हैं। कोई बेटी की शादी के लिए तो कोई परिवार के सदस्य के बीमार होने पर साहूकारों से कर्ज लेता है। पांच से 10 फीसद पर मिलने वाले इस कर्ज के बोझ तले दबी महिलाएं आज स्वयं सहायता समूह की मदद से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह समूह से जुड़कर आपस में बचत करती हैं तो जब भी इन्हें किसी काम के लिए धनराशि की आवश्यकता पड़ती है तो समूह से दो फीसद की ब्याज पर ऋण लेती हैं। इससे जहां मोटी ब्याज से छुटकारा मिल रहा है तो किस्तों में रकम भरने की सहूलियत भी मिल रही है। ब्याज से समूह भी ...
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