फिरोजाबाद, फरवरी 12 -- बैंक कर्मचारी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मुखर हैं। केंद्र सरकार निस्तारित करने के बजाय कोरे आश्वासन देकर टालमटोल करती आ रही है। जिसे लेकर अब कर्मचारियों में रोष पनपने लगा है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के बोले फिरोजाबाद के संवाद में बैंक कर्मचारियों ने कहा कि अब अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार के चार नए लेबर कोड हैं, जो कोड 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह ले लेंगे। कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती होगी। सरकार ने बैंकों, एलआईसी और जीआईसी में निजीकरण एवं विनिवेश कर दिया है। निजीकरण का विरोध सामाजिक सुरक्षा, नौकरी की स्थिरता और आम जनना के वित्तीय समावेशन पर नकारात्मक प्रभाव के आधार पर किया जा रहा है, क्योंकि निजीकरण से मुनाफाखोरी बढ़ेगी और ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं में कमी आएगी। बैंकों में स्टाफ के अभाव में ल...