गंगापार, मार्च 2 -- जगनिक के आल्हा खंड और पृथ्वीराज रासो ऐतिहासिक पुस्तकों में वर्णित बुंदेलखंड के वीर योद्धाओं आल्हा-ऊदल को कुछ इतिहासकार भले ही काल्पनिक ग्रंथ मानते हों किन्तु बुंदेलखंड के अतिरिक्त प्रयागराज के बारा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत चिल्ला गौहानी में स्थित आल्हा महल उनकी वीरता का जीता-जागता उदाहरण है। बुंदेलखंड और बघेल खंड की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक धरोहर पुरातत्व विभाग के उपेक्षा से पर्यटनीय एवं सामाजिक दृष्टि से पीछे होता जा रहा है। राजपूत कालीन आल्हा ऊदल बैठक या महल या कोट या किला कहा जाने वाला ऐतिहासिक धरोहर विभागीय उपेक्षा का न केवल दंश झेल रहा है बल्कि सिमटता जा रहा है। उसके आसपास स्थित अन्य क्षेत्र भी अतिक्रमण के शिकार हो गए हैं। पर्यटन स्थल प्रयागराज जिले के मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण में बारा तहसील के अंतर्गत ...