भागलपुर, दिसम्बर 18 -- प्रस्तुति : प्रदीप कुमार राय पूर्णिया जैसे कृषि प्रधान जिले में बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। ऐसे में मशरूम उत्पादन महिला सशक्तीरण और ग्रामीण आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकता है। यदि महिलाओं को प्रशिक्षण, बाजार से जोड़ने और वित्तीय सहयोग मिल जाए तो वे इसे लघु उद्योग के रूप में विकसित कर सकती हैं। फिलहाल पूर्णिया में मशरूम उत्पादन को लेकर जागरूकता की भारी कमी है, हालांकि जलालगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यान विभाग इसके प्रसार के लिए प्रयासरत हैं। मशरूम खेती खासकर भूमिहीन, छोटे किसानों और महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि इसे घर के कमरे या झोपड़ी में भी आसानी से किया जा सकता है। यह न केवल अतिरिक्त आमदनी का जरिया है बल्कि पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है, क्योंकि मशरूम प्रोटीन, फाइ...
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