भागलपुर, दिसम्बर 30 -- - प्रस्तुति : असद खान सुबह की चाय से लेकर बच्चों के नाश्ते तक, दूध हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह ताजा दूध हमारी दहलीज तक कैसे पहुंचता है? इसके पीछे छिपी है दूधवालों की कठिन मेहनत, जो हर सुबह सूरज उगने से पहले शुरू होती है। सर्दी हो, गर्मी या बारिश - हर मौसम में ये गुमनाम नायक बिना थके अपने कर्तव्य निभाते हैं। जब हम नींद में होते हैं, तब वे साइकिल या मोटरसाइकिल लेकर खेतों और डेयरियों की ओर निकल पड़ते हैं ताकि हर घर तक ताजा दूध पहुंचे। उनकी सेवा और समर्पण के बिना हमारी सुबह अधूरी है। फिर भी, इन्हें न तो बीमा सुरक्षा मिलती है, न कोई सुविधा। दूधवाले चाहते हैं कि उन्हें जीवन बीमा, पेंशन और सरकारी सहायता का लाभ मिले, ताकि उनका परिश्रम और हमारा भरोसा दोनों सुरक्षित रह सकें। दूध हमारी दि...