भागलपुर, फरवरी 11 -- -प्रस्तुति: संजय बर्णवाल घने वन क्षेत्र में अवस्थित आदिवासी समाज के बच्चों को शिक्षित करने वाला विद्यालय स्वयं समस्याग्रस्त है। विद्यालय मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बन चुका भारत अब विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। अभिभावक एवं बुद्धिजीवी परिचर्चा करते सुने जाते हैं कि क्या ऐसे विद्यालयों से निकले बच्चे विश्व पटल पर लहरा रहे भारत देश के परचम को आगे लहराने में कारगर साबित हो सकेंगे। पांच वर्ग कक्षों के बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र दो कमरे उपलब्ध हैं। इसके अलावा एक प्रधानाध्यापक, एक शिक्षक एवं एक शिक्षा सेवक के सहारे विद्यालय संचालित हो रहा है। विद्यालय की स्थापना के 15 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक इसे पूर्ण सुविधाओं ...
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