आगरा, जनवरी 19 -- सर्दी हो या बरसात या फि आंधी तूफान। चाहे पानी कितना भी गहरा क्यों न हो। वे मदद की गुहार सुनते ही दौड़ पड़ते हैं जान बचाने के लिए, जान जोखिम में डालकर भी वे अपना इंसानियत भरा कर्तव्य निभाने में पीछे नहीं रहते। वह भी बिना किसी लोभ, लालय या मेहनताने और कीमत के। कई वर्षों से लगातार रोते बिलखते परिवारों के चेहरे पर खुशी लौटाने की भरसक कोशिश करते-करते अब तक करीब 100 से अधिक लोगों की जान बचा चुके हैं, कभी-कभी ऐसा भी होता है उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी डूबे हुए की जान नहीं बचा सके, लेकिन उनके शवों को निकालकर परिजनों को अंतिम दर्शन करने के लिए निकालकर ला चुके हैं। ऐसे देवदूतों का गांव है भैंसोरा। जहां इतना सेवा और इंसानियत की मिसाल पेश करते आ रहे देवदूतों के रूपों में गोताखोरों को सरकारी स्तर से कोई सम्मान नहीं मिल पाया। जरूरत है...
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