वाराणसी, मार्च 3 -- लखनऊ। शहरी विकास की धुरी रहे मोहल्ले में बाहरी चमक तो खूब दिखती है मगर अंदर के हालात दयनीय और चिंतनीय दिखते हैं। खासकर राजभर और हरिजन बस्तियों में। इनमें विकास बांस-बल्लियों में फंसा हुआ है तो घरों की बाल्टियों से गंदा पानी छलकता है। हर सुबह मलजल से आवाजाही मजबूरी है तो उबड़-खाबड़ गलियों में शाम के बाद अंधेरा छा जाता है। रास्ते जर्जर और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जे का दंश। अगल-बगल विकास का परचम लहराते देख बाशिंदों की पीड़ा-तनाव हमेशा बढ़ा रहता है। उन्हें राहत की दरकार है। ---------------- महापालिका के समय से पैगंबरपुर शहर का हिस्सा है। पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग के किनारे बसे इस मोहल्ले को व्यावसायिक रूप धरते देर नहीं लगी मगर पुरानी बस्तियों के बाशिंदों की डगर अब भी मुश्किलों से घिरी है। 'हिन्दुस्तान' से बातचीत के दौरान उनक...
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