वाराणसी, फरवरी 5 -- वाराणसी। मानिकपुर डिहवा के बाशिंदे काफी समय से आश्वासनों के सहारे जीवन जी रहे हैं। अब उनकी उम्मीदें टूटने लगी हैं। यहां रास्ते पर अतिक्रमण है तो रात में अंधेरा पसरा रहता है। दशकों से बरसात के दौरान जलजमाव का दर्द झेल रहे हैं। शिकायतों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। हर शिकायत पर 'आश्वासन' का पुराना रोग जकड़ लेता है। बुनियादी सुविधाओं का दूर नहीं हो रहा है। यह मोहल्ला बनारस स्टेशन (मंडुवाडीह) के द्वितीय द्वार से ज्यादा दूर नहीं है जबकि 'सुविधाएं' बाशिंदों से बहुत दूर हैं। ----------- राजकीय महिला महाविद्यालय (बीएलडब्ल्यू) के पीछे के मानिकपुर डिहवा मोहल्ले में मुख्यमार्ग से दुश्वारियां शुरू हो जाती है। थोड़ा आगे बढ़ते ही कदम लड़खड़ा लगते हैं। यह संत्रास यहां के लोग रोज झेलते हैं और नियति मानकर आगे बढ़ जाते हैं। 'हिन्दुस्त...
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