भागलपुर, नवम्बर 23 -- - प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज/देवाशीष गुप्ता कटिहार की गलियों में कभी रौनक और रफ्तार की पहचान थी, लेकिन अब वही सड़कें थम-सी गई हैं। शहर का हर मोड़ जाम की गिरफ्त में है, जहां हॉर्न की आवाज़ों में बेचैनी घुली रहती है। एंबुलेंस का सायरन ट्रैफिक में डूब जाता है, और मरीज जिंदगी-मौत से जूझते हैं। दफ्तर जाने वाले थक चुके हैं, स्कूल बसें देर से पहुंचती हैं, दुकानदारों की बिक्री ठप है। विकास की रफ्तार कागजों पर चल रही है, लेकिन सड़कों पर लोगों का सब्र टूट रहा है। प्रशासन के दावे हवा में उड़ते दिखाई देते हैं, जबकि शहरवासी रोज़ इस जाम के दर्द से गुजर रहे हैं। कटिहार अब रौनक नहीं, राहत मांग रहा है। हर दिन वही सवाल गूंजता है- कब मिलेगी इस कैद से आज़ादी? कटिहार की पहचान कभी फुर्ती और रौनक से थी, लेकिन अब यह शहर जाम और पार्किंग संकट...
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