भागलपुर, दिसम्बर 20 -- प्रस्तुति : ओमप्रकाश अम्बुज कटिहार की धरती कभी सरसों के पीले फूलों से ढकी रहती थी। जाड़े की धूप में चमकते खेत, खुशबू भरी हवा और गूंजती मधुमक्खियां ग्रामीण पहचान थीं। अब वही खेत बदल गए हैं, पर किसानों के दिल में सरसों अब भी उम्मीद है। राज्य और केंद्र सरकार की बीज अनुदान, मिनी किट वितरण और तकनीकी योजनाओं से सीमांचल में तिलहन खेती फिर लौट रही है। सरसों, तिल, मूंगफली, अलसी और सूरजमुखी यहां की प्रमुख फसलें हैं, लेकिन उचित दाम और खरीद व्यवस्था की कमी से किसान निराश हैं। सरसों खेती सिर्फ आय नहीं बढ़ाती, बल्कि मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन और शुद्ध तेल से ग्रामीण जीवन व स्वास्थ्य को मजबूती देती है। किसानों की मांग है- उचित समर्थन मूल्य, स्थानीय खरीद केंद्र और सिंचाई की पक्की व्यवस्था। सही सहयोग मिला तो पीली सरसों फिर लौटेगी खे...