भागलपुर, मार्च 3 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप होली की आहट के साथ ही शहर से लेकर गांव तक के बाजार रंग-बिरंगे नजर आने लगे हैं। फुटपाथों पर सजे अस्थायी स्टॉल हों या बड़ी दुकानों की चमचमाती शेल्फ-हर जगह अबीर, गुलाल और रंगों की बहार है। कम कीमत का लालच ग्राहकों को अपनी ओर खींच रहा है। बच्चे मुट्ठी भर रंग को हवा में उड़ाकर खुश हो रहे हैं, लेकिन इसी रंगीन उत्साह के पीछे एक अदृश्य खतरा भी तेजी से पांव पसार रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अत्यधिक सस्ते और बिना ब्रांड वाले रंगों में मिलावट की आशंका सबसे अधिक होती है। कई नकली रंगों में सीसा, क्रोमियम, बारीक कांच पाउडर और कृत्रिम डाई जैसे हानिकारक रसायन मिलाए जाते हैं। ये तत्व त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाते हैं और एलर्जी, जलन, खुजली, लाल चकत्ते तथा संक्रमण जैसी समस्याएं पै...