भागलपुर, मार्च 27 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप कटिहार जिले की मिट्टी में कभी सफेद सोना उगता था, लेकिन आज वही आलू किसानों की आंखों में आंसू बनकर उतर रहा है। खेतों में हरियाली तो दिखती है, लेकिन किसानों के चेहरों पर मायूसी साफ झलकती है। जिस फसल से घर चलता था, बच्चों की पढ़ाई होती थी, वही अब कर्ज और चिंता का कारण बन गई है। जिले के करीब 20 हजार किसान सीधे तौर पर आलू की खेती से जुड़े हैं। 18 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में आलू की बुआई होती है, लेकिन मेहनत के बाद भी किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा। बढ़ती लागत और गिरते बाजार भाव ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है।किसान बताते हैं कि एक एकड़ आलू की खेती में करीब 50 हजार रुपये तक खर्च आता है। बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई - हर स्तर पर लागत बढ़ चुकी है। लेकिन ...
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