भागलपुर, दिसम्बर 30 -- - प्रस्तुति : ओमप्रकाश अम्बुज किताबों में दर्ज प्रयोग, चित्रों में बने उपकरण और बोर्ड पर लिखे सूत्र यही आज कई स्कूलों में विज्ञान की पहचान बन गए हैं। सवाल पूछने, छूकर देखने और खुद प्रयोग कर सीखने की जो जिज्ञासा बच्चों की आंखों में होनी चाहिए, वह बुझती जा रही है। प्रयोगशालाओं के दरवाजे बंद हैं और अलमारियों में कैद उपकरण खामोशी से सिस्टम की उदासीनता बयान कर रहे हैं। अनेक स्कूलों में विज्ञान सिर्फ परीक्षा पास करने का साधन बनकर रह गया है, सीखने और समझने का माध्यम नहीं। प्रयोग और अनुभव के अभाव में छात्र विज्ञान को महसूस नहीं कर पा रहे। यह खामोशी सिर्फ प्रयोगशालाओं की नहीं, बल्कि उस वैज्ञानिक सोच की है जो नई पीढ़ी के मन से गायब होती जा रही है। सवाल यह है कि जब विज्ञान से जुड़ी उत्सुकता ही खत्म हो जाएगी तो देश का वैज्ञानिक...
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