भागलपुर, जनवरी 20 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज जिले का किसान आज दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर मौसम और बाजार का जोखिम, दूसरी ओर खाद और बीज की मनमानी कीमत। खेती अब मेहनत से ज्यादा संघर्ष बनती जा रही है। पारंपरिक खेती से बढ़ता घाटा, नई तकनीक की जानकारी का अभाव और प्रशिक्षण की कमी ने किसानों को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां वे मजबूरी में गलत फैसले लेने को विवश हैं। इसका सीधा असर फसल, खेत की उर्वरा शक्ति और किसान की आर्थिक हालत पर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर प्रशिक्षण और जागरूकता नहीं मिलने से वे असली-नकली बीज और खाद की पहचान नहीं कर पाते। मक्का, धान, पाट, आलू, सरसों जैसी फसलों के बीज खरीदते समय किसान सबसे ज्यादा ठगे जाते हैं। कई बार नामी ब्रांड के नाम पर महंगे बीज खरीदे जाते हैं, लेकिन जब पौधा निकलता है और फसल आती है, तब जाकर...
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