पूर्णिया, दिसम्बर 4 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज/मणिकांत रमण कटिहार की बेटियां हर साल इंटर पास करने के बाद वहीं ठहर जाती हैं, जहां आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिलता। जिले में उच्च शिक्षा संस्थान और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों की कमी उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा है। डॉक्टर, अफसर या इंजीनियर बनने की चाहत उनकी आंखों में चमकती है, लेकिन सुविधाओं का अभाव उस चमक को धीमे-धीमे बुझा देता है। गांव से शहर तक का सफर उनके लिए डर, दूरी और आर्थिक मजबूरी से भरा होता है। अधिकांश परिवार बेटियों को दूसरे शहर नहीं भेज पाते, जिससे पढ़ाई बीच में ही रुक जाती है। नतीजतन, जो सपने कभी आकाश छूने की उम्मीद लिए जन्म लेते हैं, वे धीरे-धीरे पिंजरे में बंद परिंदों जैसे हो जाते हैं। सरकार की योजनाएं और वादे कागजों पर सीमित रह जाते हैं। कौशल विकास और महिला शिक्षा के नाम पर चला...
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