भागलपुर, दिसम्बर 11 -- - प्रस्तुति : नीरज कुमार/देवाशीष गुप्ता कटिहार बाजार शहर की धड़कन है- जहां हर सुबह दुकानों के शटर उठते ही जिंदगी की हलचल शुरू हो जाती है और शाम तक रौनक बनी रहती है। यह सिर्फ खरीद-फरोख्त की जगह नहीं, बल्कि कटिहार की सामाजिक और आर्थिक पहचान का आईना है। लेकिन आज यही बाजार जाम, अतिक्रमण और अव्यवस्था के बोझ से कराह रहा है। जहां कभी रफ्तार और रौनक साथ चलती थीं, वहां अब खड़ी गाड़ियों, बंद रास्तों और टूटी सड़कों का जाल फैला है। भीड़ और बेढंगे यातायात ने इस बाजार की सांसें थाम दी हैं। दुकानदारों का सड़क पर कब्जा, वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग और प्रशासनिक लापरवाही ने मिलकर व्यवस्थाओं को खोखला बना दिया है। कभी जिस बाजार को जिले की आर्थिक धड़कन कहा जाता था, वह आज ट्रैफिक जाम और अनियोजित निर्माण के बोझ तले दब चुका है। नगर निगम ...
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