भागलपुर, दिसम्बर 17 -- - प्रस्तुति : नीरज कुमार/देवाशीष गुप्ता हर शहर को सांस लेने के लिए हरे-भरे पार्कों की जरूरत होती है- जहां बच्चों की हंसी गूंजे, बुजुर्ग सुकून के पल बिताएं और युवा उम्मीदों के सपने देखें। कटिहार में करोड़ों की लागत से बना आधुनिक चिल्ड्रेन पार्क भी ऐसे ही सपनों का प्रतीक था। उद्देश्य था शहरवासियों को बेहतर जीवन और मनोरंजन का सुरक्षित स्थान देना। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही ने इस सपने को दम तोड़ने पर मजबूर कर दिया। आज जहां रौनक होनी थी, वहां सन्नाटा पसरा है। टूटी टाइलें, उगी झाड़ियां और गंदगी इस उपेक्षा की कहानी कहती हैं। कभी शहर की शान बनने की कोशिश अब उपेक्षा का प्रतीक बन चुकी है। यह सिर्फ एक पार्क की नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवस्था पर उठते सवालों और टूटती उम्मीदों की कहानी है- जहां जनता बदलाव की उम्मीद में आ...