भागलपुर, जनवरी 30 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप कटिहार जिला खेती-किसानी के लिए जाना जाता है। यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी खेतों पर निर्भर है। धान, गेहूं, मक्का से लेकर सब्जी, फल, मत्स्य पालन और पशुपालन तक। किसानों की मेहनत ही जिले की पहचान है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस किसान की जिंदगी खेत से चलती है, वही किसान सरकारी योजनाओं की सबसे अहम कड़ी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से दूर होता जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो जिले में केसीसी योजना लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है, और इसकी सबसे बड़ी वजह बन रही है-भूमि के दस्तावेज। केसीसी बनवाने के लिए आधार, पैन, फोटो, फसल विवरण और आवेदन फॉर्म जैसी औपचारिकताएं तो किसान किसी तरह पूरी कर लेते हैं, लेकिन असली संकट जमीन के कागजों पर आकर खड़ा हो जाता है। जिले के अधिकतर किसानों के पास जमीन तो ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.