भागलपुर, फरवरी 7 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप कटिहार जिला मुख्यालय आज शिक्षा का उभरता केंद्र बन चुका है। दूर-दराज के इलाकों से सैकड़ों छात्राएं बेहतर पढ़ाई, कोचिंग और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद लेकर यहां पहुंचती हैं। किसी के हाथ में किताबें होती हैं, तो किसी की आंखों में बड़े सपने। लेकिन इन्हीं सपनों की राह में सबसे बड़ी रुकावट बनकर खड़ी है। असुरक्षित निजी महिला छात्रावासों की व्यवस्था। शहर में तीन दर्जन से अधिक महिला हॉस्टल संचालित हो रहे हैं, मगर सुरक्षा, सुविधा और जवाबदेही के मामले में अधिकांश पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' के 'बोले कटिहार' अभियान के तहत जब छात्राओं से बात की गई, तो उनकी आवाज में डर, असमंजस और गहरी पीड़ा साफ झलकी। छात्राओं का कहना है कि पढ़ाई के लिए शहर आना उनके लिए मजबूरी है, लेकिन ...
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