भागलपुर, जून 15 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप गंगा सिर्फ जलधारा नहीं, करोड़ों जनमानस की मां है- जो जन्म देती है, शुद्ध करती है, मोक्ष का द्वार खोलती है। मनिहारी घाट पर जब श्रद्धालु गीली आंखों और भीगे मन से मां गंगा की शरण में पहुंचते हैं तो उनके भीतर आस्था, शांति और आत्मबल का भाव उमड़ता है। लेकिन ये भाव तब कराह में बदल जाते हैं, जब मां की गोद में उन्हें असुरक्षा, गंदगी और उपेक्षा मिलती है। यह सिर्फ घाट की बदहाली नहीं, श्रद्धा के साथ किए जा रहे अन्याय की पीड़ा है - जहां आस्था डगमगाती है और विश्वास असहाय होकर प्रश्न करता है: क्या मां की गोद भी अब सुरक्षित नहीं गंगा सिर्फ नदी नहीं है, करोड़ों लोगों की मां है। हर सुबह, सूरज की पहली किरणों के साथ जब मनिहारी घाट पर श्रद्धालु 'गंगे च यमुने चैव... का उच्चारण करते हुए जल में उतरते हैं ...
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