बाराबंकी, दिसम्बर 16 -- जिले में ऑडिटोरियम और समुचित सांस्कृतिक मंच की व्यवस्था न होने से स्थानीय रंगमंच कलाकारों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। न तो नियमित नाट्य प्रस्तुतियों के लिए स्थायी मंच उपलब्ध हैं और न ही अभ्यास व कार्यशालाओं के लिए उपयुक्त स्थान। ऐसे में जिले के प्रतिभाशाली कलाकारों को मजबूरी में लखनऊ, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय कलाकारों का कहना है कि बाहर जाकर प्रशिक्षण लेना न केवल खर्चीला है, बल्कि इससे कई उभरती प्रतिभाएं आर्थिक तंगी के कारण आगे बढ़ ही नहीं पातीं। हिन्दुस्तान की बोले टीम की एक रिपोर्ट... बाराबंकी। शहर के मोहल्ला पीरबटावन निवासी प्रभात दीक्षित कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी नाम बन चुके हैं। प्रभात जिले में ही नहीं प्रदेश में इनके कार्यो की सराहना की जाती ...
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