गया, मई 17 -- बोधगया का पुरातत्व संग्रहालय बौद्ध संस्कृति, कला और इतिहास के वैभव को सहेज कर रखा हुआ है। वर्ष 1956 में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने इस संग्रहालय का उद्घाटन किया था। आज भी यह संग्रहालय देश-विदेश से बोधगया आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और शोधार्थियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा स्थापित इस संग्रहालय में संरक्षित पुरावशेष बोधगया की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। संग्रहालय में भगवान बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में निर्मित दुर्लभ प्रतिमाएं रखी गयी है। इसमें भूमिस्पर्श मुद्रा, धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा और अभय मुद्रा में बनी मूर्तियां अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला और आध्यात्मिक आभा के कारण पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। बुद्ध के विभिन्न मुद्राओं के अलावा यहां ...