बैलों की पालने की जोखिम के चलते मशाीनों पर बढ़ी निर्भरता
अररिया, जून 10 -- कुर्साकांटा, निज प्रतिनिधि खेती किसानी की बात आते ही हमारे मन में हल बैल से खेती की बातें आ जाती है। अब हल बैल से खेती बीतें दिनों की बात हो गई। नई पीढ़ी के ज्यादातर किसान हल बैल से खेती करना नहीं चाहते हैं। अब हल बैल की जगह ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, हैरो, टिलर सहित कई तरह की मशीनें ले ली है। चारागाहों की कमी, बैलों की बढ़ती कीमत, बैलों की पालने की जोखीम, मजदूरों की कमी और समय की बचत के कारण किसान खेती की जुताई में हल बैल की जगह मशीनों से काम ले रहे हैं। हालांकि कुछ छोटे और सीमांत किसान अब भी हल बैल से ही खेतों की जोत आबाद कर रहे हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक हर किसान के पास बैल होता था। बैल से खेतों की जुताई होती थी, लेकिन बदले परिस्थति में बैलों की जगह ट्रैक्टर व पावर टैलर ले लिया है। किसान बैल नहीं पाल रहे हैं। आधुनिक तकन...
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