मुजफ्फरपुर, जनवरी 25 -- मुजफ्फरपुर। कभी मुंशी प्रेमचंद ने सवा सेर गेहूं कहानी के जरिये पुश्तों तक साहूकार के कर्ज तले दबे किसानों की व्यथा को उभारा था। किरदार भले काल्पनिक रहे हों, मगर यह आचरण आज भी सामाजिक व्यवस्था में जड़ें जमाए हुए है। किसान महाजनों के कर्ज तले न दबे, बल्कि अपनी पूंजी से खेतों में फसलें लहलहाती देख सकें, इस परिकल्पना से सरकार ने कम ब्याज दर पर किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की, मगर जिले में यह फाइलों में ज्यादा, धरातल पर कम उतर पाई है। चालू वित्तीय वर्ष में लक्ष्य का 18% से भी कम किसान लाभान्वित हो पाए हैं। किसानों का कहना है कि बैंकों का रवैया उदासीन रहने के कारण दलालों की दखल बढ़ गई है। कागजात के नाम पर इतना दौड़ाया जाता है कि योजना का लाभ नहीं ले पाते। बैंकों की मदद मिले तो अनाज का बेहतर उत्पादन कर सकें। केसीसी के ज...
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