नई दिल्ली, अप्रैल 15 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि बैंक अपने ग्राहकों के एजेंट के तौर पर काम करते हैं और उन पर एक 'कानूनी दायित्व' होता है कि वे पूरी सावधानी बरतें और चेक को 'पुराना' होने से पहले ही कलेक्शन के लिए पेश करें, क्योंकि ऐसी लापरवाही सेवा में एक स्पष्ट कमी मानी जाएगी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने केनरा बैंक को सेवा में कमी का दोषी ठहराया, क्योंकि वह चेक को उनकी वैधता अवधि के भीतर पेश करने में विफल रहा। हालांकि, पीठ ने शिकायतकर्ताओं को दी गई मुआवजा राशि कम कर दी। जस्टिस भुइयां ने इस मामले में 57 पन्नों का फैसला लिखा। उन्होंने कहा कि कलेक्शन के लिए चेक स्वीकार करने वाला बैंक ग्राहक के एजेंट के तौर पर काम करता है और उस पर यह दायित्व होता है कि वह निर्धारित वैधता अवधि के भीतर उन दस्तावेजों (चेक) को...
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