भभुआ, मार्च 8 -- पेज चार की खबर बेरोज़गारी की मार में पिसते टेंपो चालक, सड़क ही बनी रोज़गार की आख़िरी उम्मीद कर्ज लेकर खरीदे टेंपो, दिनभर की मेहनत से चल रहा परिवार दुकानदारों, सवारियों और पुलिस के दबाव में गुजरता हर दिन भभुआ, नगर संवाददाता। शहर की सड़कों पर सवारी के इंतजार में खड़े टेंपो चालक आज बेरोज़गारी की सबसे जीवंत तस्वीर बनकर सामने आ रहे हैं। रोज़ी-रोटी की तलाश में किसी ने घर की जमा पूंजी लगा दी, तो किसी ने कर्ज लेकर टेंपो या ई-रिक्शा खरीदा। पढ़े-लिखे होने के बावजूद जब कहीं नौकरी नहीं मिली, तो मजबूरी में सवारी ढोना ही जीवनयापन का साधन बन गया। टेंपो चालकों का कहना है कि सुबह से देर शाम तक कड़ी मशक्कत के बाद मुश्किल से 300 से 400 रुपये की आमदनी हो पाती है। इसी सीमित कमाई से बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और रोज़मर्रा के खर्च पूरे किए जाते हैं।...
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