गिरडीह, अप्रैल 7 -- आशीष कुमार मंटु रेम्बा, प्रतिनिधि। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगार लड़कों का अरेंज मैरिज विकराल समस्या के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। बेटियों के माता-पिता सरकारी नौकरी वाले दामाद के लिए आतुर हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि, आर्थिक संपन्नता भी अरेंज मैरिज के मार्ग को सुगम नहीं बना पा रहा है। किसी कीमत में माता-पिता को दामाद के रूप में सरकारी नौकरी वाला ही युवक की तलाश बनी रहती है। पारिवारिक पृष्ठभूमि कितना ही मजबूत क्यों न हो यदि युवक बेरोजगार है तो उसके लिए शादी सपना बनता जा रहा है।यह समस्या कमोबेश सभी जातियों में है लेकिन सवर्ण तथा वैश्य वर्ग में यह समस्या विकराल बनकर सामने आ रहा है। इस बाबत सामाजिक विश्लेषक तथा शिक्षक अजीत राय की मानें तो प्रत्येक माता-पिता चाहते हैं कि अपने पैर पर खड़े स्वजातीय युवक के हाथ में बेटी को थम...