नई दिल्ली, मई 23 -- शैलेन्द्र सेमवाल देहरादून। कभी दिसंबर-जनवरी में बर्फ की मोटी चादर ओढ़ने वाला हिमालय अब मौसम के बदले मिजाज से जूझ रहा है। बर्फबारी का समय खिसककर मार्च-अप्रैल तक पहुंच गया है, जिससे ग्लेशियर तेजी से कमजोर पड़ रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि यही हाल रहा तो हिमालय के जलस्रोत, पर्यावरण और करोड़ों लोगों की जिंदगी पर गंभीर असर पड़ सकता है।

बदलाव से बेहाल ग्लेशियर वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा शोध जर्मनी की एप्लाइड जियोमेटिक्स शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है। हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा हो रही बर्फबारी का कारण पश्चिमी विक्षोभ में आई असमानता है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में कमी आ रही...