नवादा, अप्रैल 19 -- नवादा जिले के खेतों में जब किसान अपनी फसल की ओर देखता है, तो उसकी आंखों में चमक के बजाय अब अनिश्चितता का डर झलकता है। मगध की इस उपजाऊ धरती पर खेती अब केवल मेहनत का खेल नहीं, बल्कि पूरी तरह से कुदरत के मूड पर निर्भर हो गई है। जिले की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था आज जलवायु परिवर्तन के उस भीषण दौर से गुजर रही है, जहां कभी सुखाड़ तो कभी बेमौसम बारिश किसान की कमर तोड़ रही है। नवादा की पकी और तैयार फसलों पर आसमानी प्रहार यहां के किसानों की नियति बन कर रह गयी है। नवादा में मार्च और अप्रैल का महीना गेहूं, चना और मसूर की कटाई का होता है। यह भी पढ़ें- बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, आंधी और सूखे से बिगड़ रही खेती की सेहत लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस समय होने वाली अचानक अतिवृष्टि और चक्रवाती बारिश ने आसमानी प्रहार का रूप ले लिया है। जिला कृ...
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