लोहरदगा, मई 27 -- लोहरदगा, संवाददाता। हमारी संस्कृति नारियों को सुरक्षा और सम्मान देने की रही है। वर्तमान परिस्थितियों बच्चियां सुरक्षित नहीं है। बच्चियों को शारीरिक के क्षमता विकसित करने के साथ बौद्धिक विकास करना नितांत जरूरी है। यह समय की मांग है। तभी बच्चियों कोई बहला-फुसलाकर उनके साथ गलत नहीं कर पाएगा। आज के आधुनिक मीडिया माध्यमों ने सामाजिक माहौल को गंदा बना दिया गया है। इससे बचने की जरूरत है। भारत की संस्कृति में नारियों का सम्मान अनादि काल से चला आ रहा है। इस संस्कृति को हमें बचाने की जरूरत है। उक्त बातें लोहरदगा व्यवहार न्यायालय की जिला जज द्वितीय नीरज आसरी ने कहीं। वह बुधवार की रात्रि में आयोजित गुरुकुल शांति आश्रम और आर्य वीर दल झारखंड प्रदेश द्वारा आयोजित सात दिवसीय रानी लक्ष्मीबाई आर्य वीरांगना शिविर के भव्य समापन समारोह को बत...