नई दिल्ली, जुलाई 7 -- आज के समय में बच्चे कम उम्र में ही बड़े होने लगे हैं। उनका शारीरिक और मानसिक विकास अब उस उम्र में हो रहा है, जब उन्हें बेफिक्र होकर खेलना-कूदना चाहिए। खासतौर से लड़कियों में समय से पहले यौवन (अर्ली प्यूबर्टी) आने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले जहां 11 से 13 साल की उम्र में पीरियड्स और फिजिकल चेंजेस नजर आते थे, वहीं अब यही बदलाव 8-9 साल की बच्चियों में भी दिखने लगे हैं। यह सिर्फ एक मेडिकल प्रॉब्लम नहीं है, बल्कि बच्चियों के बचपन, मेंटल कंडीशन और इमोशनल बैलेंस के लिए भी एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में आई एक रिसर्च के अनुसार, अर्ली प्यूबर्टी से जूझ रही बच्चियों में फ्यूचर में डिप्रेशन, एंग्जाइटी और ADHD जैसी प्रॉब्लम्स होने की संभावना ज्यादा होती है। ऐसे में बस एक ही सवाल मन में आता है कि आखिर क्या वजह है...
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