हाथरस, अक्टूबर 5 -- हाथरस। बेटियां या महिलाएं जब पिता या पति का अंतिम संस्कार कर सकती हैं तो श्राद्ध भी कर सकती हैं। हिंदू धर्म के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका श्राद्ध जरूरी होता है। ऐसा करने से उनकी आत्माएं तृप्त होती हैं। हमें आशीर्वाद मिलता है।आचार्य बल्लभ जी महाराज का कहना है कि आम तौर पर श्राद्ध पुत्र या पौत्र करता है। यदि दोनों लोग नहीं हों तो घर की महिलाएं पितरों का तर्पण कर सकती हैं। गरुण पुराण के अनुसार बड़े या छोटे पुत्र के अभाव में पत्नी, कन्या व पुत्रवधू भी श्राद्ध कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वनवास में पितृ पक्ष के दौरान राजा दशरथ का श्राद्ध करने के लिए गया जा पहुंचे। यह भी पढ़ें- पितृपक्ष: मातृ नवमी पर दिवंगत मातओं का श्रद्धा से हुआ तर्पण लक्ष्मण श्राद्ध का साम...