उन्नाव, फरवरी 10 -- बीघापुर। आत्मबोध पाने के लिए अपने बुद्धि के ऊपर छाई हुई धुंधली को मिटाना होगा, तभी लौकिक सुखों के साथ-साथ आत्मिक सुख भी प्राप्त होंगे। यह उद्गार कथा का रसपान कराते हुए वृंदावन धाम से आईं कथा वाचिका आराध्या किशोरी ने अढ़ौली गांव स्थित ज्वाला देवी मंदिर परिसर में दूसरे दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कलियुग में ज्ञान वैराग्य से बढ़कर भक्ति है। भक्ति के पुत्र ज्ञान और वैराग्य कलिकाल में अत्यंत कमजोर अवस्था में थे। नारद भी भक्ति के पुत्रों की समस्या का समाधान नहीं कर सके। नारद ने सनकादि ऋषियों से समस्या का समाधान पूछा तो उन्होंने कहा कि भागवत चर्चा से ही ज्ञान वैराग्य स्वस्थ होंगे। कथा श्रवण करने वालों में प्रमुख रूप से यजमान राम संजीवन सिंह, चंद्र किशोर सिंह, अनुपम सिंह व राम किशोर आदि मौजूद रहे।
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