वाराणसी, मार्च 18 -- वाराणसी। सात वार में नौ त्योहार मनाने वाले बनारस की सांस्कृतिक परंपरा अद्भुत है। 'बुढ़वा मंगल' इसका अभिन्न अंग है। मंगलवार को असि घाट पर इसके आयोजन में लोक के महामंगल की कामना का स्वर मुखर हुआ। काव्यार्चन के तहत यह कार्यक्रम तीन सत्र काव्य मंगल, सम्मान मंगल और सुर मंगल में सम्पादित हुआ। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित पं. जवाहर लाल और साथियों ने शहनाई की मंगल ध्वनि से श्रीगणेश किया। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की ओर से आयोजित लोकपर्व में काशीवासियों का स्वागत संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने किया। काव्य मंगल सत्र में काशी के कविकुल ने कविता, गीत, गजल, छंद, मुक्तक से लोक के महामंगल की कामना की। सुर मंगल सत्र में लोक और उपशास्त्रीय संगीत गूंजा। दो सत्रों के बीच सम्मान मंगल सत्र में एसिड अटैक सर्वाइवर पद्मश्री प्रो. ...
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