नई दिल्ली, अक्टूबर 16 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने बुजुर्ग गृहिणियों के योगदान को लेकर एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बढ़ती उम्र के साथ किसी बुजुर्ग महिला का परिवार के लिए बेशक आर्थिक सहयोग ना हो, लेकिन एक मार्गदर्शक रूप में उसकी भूमिका और भावनात्मक सहारे के रूप में उपस्थिति बेहद अमूल्य है। जस्टिस अनीश दयाल की बेंच ने सड़क दुर्घटना में दिव्यांग 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मुआवजा रकम बढ़ाते हुए यह टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि मुआवजे का अंदाजा इस रूढ़िवादी धारणा या सोच के आधार पर नहीं लगाया जा सकता कि कोई व्यक्ति सिर्फ उम्र के कारण घर में योगदान देना बंद कर देता है। घरेलू काम के लिए पैसे न मिलने से दुर्घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को फायदा नहीं पहुंचाया जा सकता या पीड़िता को मिलने वाले मुआवजे को कम नहीं ...