झांसी, जुलाई 9 -- झांसी। बुन्देलखंड क्षेत्र खेती पर ही अधिकांश निर्भर रहता है। ऐसे में किसानों के लिए केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ कहते है कि यदि किन्हीं किसान की भूमि बंजर जैसी है तो वह जामुन की खेती कर सकते है। इस फल की खूब बिक्री रहती है। बुंदेलखंड की बंजर, पथरीली एवं कम वर्षा वाली भूमि को लाभदायक बागवानी में बदलने के लिए जामुन की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के फल विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. रंजीत पाल ने किसानों के लिए जामुन की वैज्ञानिक खेती पर कहा कि यह फल फसल न केवल कम पानी और प्रतिकूल परिस्थितियों में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती।

जलवायु और मिट्टी की अनुकूलता डॉ. पाल ने बताया कि बुंदेलखंड की जलवायु, कम एवं अनियमित वर्षा, सूखे की स्थिति तथा पथरीली भूमि जामुन की खेत...