उरई, मार्च 20 -- उरई। बुंदेलखंड की परंपरागत जल संचयन पद्धतियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। सदियों पुरानी "हरवा" प्रणाली को वैज्ञानिक स्वरूप देकर वर्षा जल को खेतों में ही संरक्षित एवं भूजल में रिचार्ज करने का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे आने वाले समय में सुखद परिणाम सामने आएंगे। बुंदेलखंड क्षेत्र में तालाब, तलैया, गड़ा, नरवा और हरवा जैसी परंपरागत जल संरचनाएं जल प्रबंधन की मजबूत आधार रही हैं। इनमें "हरवा" विशेष रूप से खेतों में वर्षा के दौरान बनने वाली प्राकृतिक जलधाराओं को नियंत्रित कर पानी के प्रवाह को व्यवस्थित करने का कार्य करता है। पहले किसान बैलों से जुताई के बाद खेतों को समतल कर इन जलधाराओं का उपयोग करते थे, जो आगे चलकर बड़े नालों से जुड़ जाती थीं। अब इसी पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए खे...
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