नई दिल्ली, अगस्त 19 -- तीस साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 रुपये की रिश्वत के आरोप में दो सरकारी कर्मचारियों को बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पैसे मिलने से रिश्वत साबित नहीं होती, पैसे मांगने की बात साबित होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गुजरात सरकार के दो कर्मचारियों को 1996 में दर्ज हुए भ्रष्टाचार के मामले में बरी किया। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने एक तलाटी-कम-मंत्री यानी गांव स्तर के राजस्व अधिकारी और उसके अधीन काम करने वाले एक चपरासी की सजा रद्द कर दी। यह भी पढ़ें- 20 रुपये की घूस पर 30 साल चली कानूनी-अदालती जंग, सुप्रीम कोर्ट ने अब क्या कहा?सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पीठ ने कहा कि चपरासी के पास से केवल 20 रुपये मिलना उसकी सजा बरकरार रखने के लिए पर्याप्त न...